- स्मार्ट सिटी प्लानिंग में जंगलों, कृषि भूमि और आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) को बचाना अनिवार्य: प्रसिद्ध वास्तुकार हफीज कॉन्ट्रैक्टर
- Ganesh Utsav 2026: Take Nath Inspiration from Shraddha Kapoor, Urmila Matondkar, Ankita Lokhande, Madhurima Tuli and Shriya Pilgaonkar
- Disha Patani, Sara Ali Khan to Alia Bhatt: Bollywood Divas Display Ways to Ace Traditional Fashion this Ganesh Chaturthi
- Pratibha Ranta Expresses Gratitude as The Revolutionaries Soars, Opens Up About Playing Pratibha Lahiri: There is so much quiet strength in the way women hold their lives together
- इंदौर में 'इंदौर टेक समिट 2026' का सफल आयोजन
स्वस्थ जीवन का आधार: संतुलित जीवनशैली, शुद्ध जल, हरियाली और जागरूकता
1 जुलाई – राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर विशेष
लेखक: डॉ. ए.के. द्विवेदी, वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक, इंदौर
“चिकित्सक केवल रोगों का उपचार नहीं करता, बल्कि समाज को स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है।”
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस केवल डॉक्टरों के सम्मान का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमें यह भी याद दिलाता है कि स्वस्थ समाज का निर्माण केवल अस्पतालों और दवाइयों से नहीं, बल्कि संतुलित जीवनशैली, स्वच्छता, सुरक्षित जल, पौष्टिक भोजन, पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता से होता है।
आज बदलती जीवनशैली के कारण कम उम्र में ही अनेक स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, कंप्यूटर एवं मोबाइल का अत्यधिक उपयोग, शारीरिक श्रम में कमी, अनियमित दिनचर्या, फास्ट फूड, तनाव और पर्याप्त नींद का अभाव अनेक रोगों को जन्म दे रहे हैं। पहले जो बीमारियाँ अधिक आयु में दिखाई देती थीं, वे अब युवाओं में भी सामान्य होती जा रही हैं।
लगातार 8–10 घंटे बैठकर कार्य करने वाले लोगों में कमर दर्द, सर्वाइकल एवं लंबर स्पोंडिलोसिस, गर्दन और कंधों में जकड़न, घुटनों का दर्द तथा वैरिकोज वेन्स जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। वहीं अनियमित भोजन, कम पानी पीना, अत्यधिक चाय-कॉफी, धूम्रपान तथा लंबे समय तक मूत्र रोककर रखने जैसी बातें कब्ज, एसिडिटी, बवासीर, फिशर, फिस्टुला, मूत्र संक्रमण तथा प्रोस्टेट संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
आज एलर्जी, त्वचा रोग, एलर्जिक राइनाइटिस, डर्मेटाइटिस तथा बार-बार होने वाले संक्रमण भी बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही एनीमिया, मसूड़ों से खून आना, बार-बार नकसीर आना या महिलाओं में अत्यधिक मासिक रक्तस्राव जैसी समस्याओं को कभी भी सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय जांच एवं उचित उपचार आवश्यक है।
स्वास्थ्य केवल उपचार से नहीं, बल्कि रोकथाम से सुरक्षित रहता है। इसके लिए पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, योग, संतुलित भारतीय भोजन और समय पर भोजन जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है शुद्ध एवं सुरक्षित जल। मानव शरीर का लगभग 60–70 प्रतिशत भाग जल से बना है। अशुद्ध जल अनेक संक्रामक एवं जल जनित रोगों का प्रमुख कारण बन सकता है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ और सुरक्षित पानी पीना प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिकता होनी चाहिए।
जल संरक्षण भी आज केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का विषय बन चुका है। यदि हमारे जल स्रोत प्रदूषित होंगे या भूजल का स्तर लगातार घटेगा, तो आने वाली पीढ़ियों का स्वास्थ्य भी संकट में पड़ जाएगा। वर्षा जल संचयन, तालाबों और कुओं का संरक्षण, जल का विवेकपूर्ण उपयोग तथा जल प्रदूषण की रोकथाम आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
स्वस्थ पर्यावरण के लिए वृक्षों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जहाँ हरियाली अधिक होती है, वहाँ वायु शुद्ध रहती है, वर्षा का संतुलन बेहतर होता है और भूजल का स्तर भी सुरक्षित रहता है। एक वृक्ष केवल ऑक्सीजन ही नहीं देता, बल्कि भविष्य के लिए जल और जीवन भी सुरक्षित करता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को प्रतिवर्ष कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प लेना चाहिए।
बच्चों का स्वास्थ्य भी समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। गर्भावस्था के दौरान संतुलित पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक वातावरण तथा जन्म के बाद उचित पोषण और संवेदनशील पालन-पोषण बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि किसी बच्चे में विकास, व्यवहार या सीखने संबंधी कठिनाइयां दिखाई दें, तो समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
एक चिकित्सक की भूमिका केवल दवा लिखने तक सीमित नहीं होती। वह रोगी को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या, मानसिक संतुलन, स्वच्छता और रोगों की रोकथाम के प्रति भी प्रेरित करता है। आधुनिक चिकित्सा का मूल उद्देश्य केवल रोग का उपचार नहीं, बल्कि व्यक्ति, परिवार और समाज को स्वस्थ बनाए रखना है।
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर आइए, हम सभी यह संकल्प लें—
स्वस्थ एवं संतुलित जीवन शैली अपनाएँ।
स्वच्छ और सुरक्षित पानी का नियमित सेवन करें।
जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण करें।
वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दें।
अधिक से अधिक वृक्ष लगाएँ और उनका संरक्षण करें।
नियमित व्यायाम, योग और पर्याप्त नींद को जीवन का हिस्सा बनाएँ।
समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराएँ तथा रोगों के प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध राष्ट्र की पहचान हैं।
इस राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर आइए, चिकित्सकों का सम्मान करने के साथ-साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लें।
“जल बचाइए, वृक्ष लगाइए, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं — यही आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा उपहार है।”


